मौला,
कुछ ऐसे लब्ज़ बना बिखेर दे मुझे
कि पढ़ी जाऊँ तो दुआ की तरह...
और
सुनी जाऊँ तो मेहर की तरह ...!
आहुति
मौला,
कुछ ऐसे लब्ज़ बना बिखेर दे मुझे
कि पढ़ी जाऊँ तो दुआ की तरह...
और
सुनी जाऊँ तो मेहर की तरह ...!
आहुति
जिसने स्वयम् को भ्रम से और भय से मुक्त कर लिया वह जीवन को वास्तविक रूप में जीता है!
जो भ्रम और भय से ग्रस्त है, वह जीवित हो कर भी मृत है!!