Friday, 18 November 2016

समझ समझ का फेर... !

जीवन यदि समझ आ जाये तो एकांत वरदान
और समझ ना आये तो अकेलापन अभिशाप बन जाता है।

Sunday, 13 November 2016

...पानी को पढ़ पाना

चाहे आँसू हो क़तरा हाे ,दरिया या समंदर हाे
आसान नहीं होता... पानी को पढ़ पाना !

"निःशब्द "

"निःशब्द " एक प्रयास है , हृदय की  अनंत गहराई और  ब्रहमाण्ड  के अनंत विस्तार में प्रवाहित  उन भावों और विचारों  की अभिव्यक्ति  का... जिनके वर्णन के लिये शब्द मंजूषा  सीमित  रह जाती है ! निःशब्द की शाब्दिक  अभिव्यक्ति  का चुनौतीपूर्ण  सतत समर्पित अनवरत प्रयास  है "निःशब्द" !